
नगर विधानसभा सीट पर अभी तक प्रदीप बतरा का कब्जा बरकरार लेकिन चेरब जैन के हौसले भी हैं कायम
एम हसीन
रुड़की। नगर विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस विधायक के तौर पर और कभी भाजपा विधायक के रूप में पिछले 15 सालों से कायम प्रदीप बतरा के सामने हालत चाहे कुछ भी हों, लेकिन उनकी रीढ़ की लचक अभी कायम हैं, हालांकि इस बीच भाजपा में टिकट के नित नए दावेदार सामने आने लगे हैं जो इस बात का इशारा दे रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ तो असामान्य है। यह भी अहम है कि बाकी सब दावेदारों की दावेदारी जहां खामोश है, महज़ होर्डिंग्स पर है, वहीं चेरब जैन की दावेदारी खुली है, घोषित है, हालांकि उनके लक्ष्य भी निर्धारित हैं। मसलन, वे भाजपा टिकट के लिए पूरी ताकत से काम करते रहेंगे लेकिन अगर टिकट न मिला तो पार्टी प्रत्याशी के लिए काम भी करेंगे। वे इस बात को अपना सौभाग्य मानते हैं कि वे अभी युवा हैं और 2027 के बाद 2032 भी उनकी पहुंच से दूर नहीं है। अर्थात, उनकी आज की दौड़ 2027 में खत्म होने के इमकान नहीं हैं।
भाजपा में जिस तरह की गतिविधियां जारी हैं उनकी रूह में यह चर्चा आम चलती रहती हैं कि पार्टी 2027 में प्रदीप बतरा का टिकट काट सकती है, हालांकि यह भी सच है कि ऐसी चर्चाएं हर चुनाव में हर सिटिंग एम एल ए को लेकर होती ही हैं। यही कारण है कि प्रदीप बतरा ऐसी चर्चाओं से निर्लिप्त राजनीति कर रहे हैं। अलबत्ता इस बात को लेकर वे चौकन्ने हैं कि उनके विरोधी भाजपाई नेता या कार्यकर्ता उन्हें हरा सकते हैं। इसलिए वे कड़ी मेहनत से चुनावी अभियान में जुटे हुए हैं।
एक ओर यह स्थिति है और दूसरी ओर वे महत्वकांक्षी हैं जो इस संभावना को खारिज नहीं करते कि बदलती राजनीति में अपने प्रभाव को कायम रखने को सजग भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए किसी का भी टिकट काट सकती है। जिन्हें अपने वरिष्ठ होने का गुमान होता है इतिहास में भाजपा उनके टिकट खास तौर पर काटती आई है। ऐसे महत्वकांक्षी भाजपाइयों में हैं तो महेंद्र काला जैसे वरिष्ठ भी हैं लेकिन जेन ज़ी ज्यादा हैं। मसलन, सौरभ सैनी, मसलन महामंत्री अक्षय प्रताप सिंह। इनमें कुछ मुखर हैं तो कुछ खामोश भी हैं। लेकिन चेरब जैन पूर्णतः मुखर हैं। उन्होंने 2024 में मेयर चुनाव को लेकर जो सक्रियता शुरू की थी, समाज के साथ संबंध विकसित करने का जो अभियान शुरू किया था, वो बदस्तूर जारी है। इस बीच यह भी अहम है कि भाजपा ने अभी तक उन्हें कहीं और एडजस्ट करके यह इशारा भी नहीं दिया है कि वे टिकट की उम्मीद न रखें। न उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया है और न ही संगठन में कोई पद दिया गया है। वे 2024 में भी कार्यकर्ता थे और आज भी कार्यकर्ता ही हैं। इस स्थिति को वे अपने पक्ष में मानते हैं। उनके निकट लोगों का मानना है कि जब करने का समय आएगा तो पार्टी भी उनका इस्तेमाल वही करेगी जो चेरब जैन भी चाहते हैं। अर्थात पार्टी उन्हें प्रत्याशी ही बनाएगी। फिर भले ही वह घड़ी 2027 में आए या 2032 में।

