पार्टी से बाहर रहकर भी यशपाल राणा प्रभावित कर रहे नगर में कांग्रेस की राजनीति, पार्टी के तमाम नेता बेचैन
एम हसीन
रुड़की। भविष्य में कांग्रेस गमन कर के पार्टी विधानसभा टिकट का दावेदार बनने के इच्छुक नगर के एक चर्चित चेहरे ने कल मुझसे पूछा, “आप बता सकते हैं कि निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़कर यशपाल मुसलमानों के कितने वोट ले लेंगे?” यह एक हाइपोथीटिकल सवाल था, जिसका जवाब मेरे पास नहीं था। बहरहाल, नगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के टिकट के लगभग सभी दावेदारों की यही स्थिति है; फिर चाहे वे कांग्रेस के भीतर बैठे हों या बाहर।
दरअसल, नगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी पूर्व मेयर यशपाल राणा की परछाई से बाहर नहीं निकल पा रही है। पार्टी के उल्लेखनीय चेहरे यशपाल राणा को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं लेकिन वे बिना यशपाल राणा कांग्रेस के भविष्य की कल्पना भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रत्येक दावेदार चाहता है कि कांग्रेस उन्हें टिकट दे लेकिन आशंकित भी है कि यशपाल राणा निर्दलीय चुनाव लड़कर उनका समीकरण बिगाड़ेंगे। दूसरी ओर यशपाल राणा हैं जो कांग्रेस से निष्कासित चले आ रहे हैं, फिर भी पार्टी की गतिविधियों में दखलंदाज हो रहे हैं। वे पार्टी में वापसी की कोशिशों में हैं, पार्टी के टिकट पर दावा कर रहे हैं, लेकिन यह भी कह रहे हैं कि (टिकट ऑर नो टिकट) उनका चुनाव लड़ना निश्चित है। अगर देखा जाए तो यह पार्टी की बांह मरोड़ने वाली बात है और इस काम को यशपाल राणा पूरी कामयाबी के साथ कर रहे हैं। जाहिर है कि इस मामले में उन्हें जनता की ही नहीं बल्कि पार्टी के भीतर से भी पूरी शै हासिल है।
जैस कि सर्वज्ञात है कि यशपाल राणा ने 2022 का चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पूरी मजबूती से लड़ा था। वे महज दो हजार वोटों के अंतर से हारे थे। इसी कारण उन्होंने 2025 में पार्टी के मेयर टिकट पर भी दावा किया था जोकि मंजूर नहीं हुआ था। उन्हें मेयर टिकट नहीं मिला था। इसी कारण उन्होंने बागी होकर अपनी पत्नी श्रेष्ठा राणा को बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ाया था और पार्टी से निष्कासित हुए थे। इसके बावजूद उन्होंने नगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों को पछाड़ दिया था। फिर स्वाभाविक है कि वे नगर में राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने हुए हैं। वे पार्टी में वापसी चाहते हैं और 2027 में विधानसभा टिकट भी चाहते हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह उनकी वापसी के खुले समर्थक हैं और पार्टी के ही एक अन्य, राष्ट्रीय, नेता भी कहते हैं कि “यशपाल राणा के अलावा पार्टी के पास कोई विकल्प नहीं है।” इसी कारण यशपाल राणा पार्टी की गतिविधियों में दखलंदाजी कर रहे हैं। संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्ष का नाम प्रस्तावित कर रहे हैं, पार्टी के राजभवन घेराव कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं।
यही वह स्थिति है जिसने पार्टी के अन्य चेहरों में बेचैनी पैदा की हुई है। ध्यान रहे कि पार्टी विधानसभा टिकट के प्रबलतम दावेदार सचिन गुप्ता हैं जो कि पार्टी टिकट पर हाल का मेयर चुनाव अपनी पत्नी पूजा गुप्ता को लड़ाकर हटे हैं। इसके अलावा एडवोकेट महिपाल सिंह भी सक्रिय हैं और प्रणय प्रताप सिंह भी। भाजपा से निष्कासित चले आ रहे पूर्व मेयर गौरव गोयल की भी कांग्रेस गमन की तैयारी है। चूंकि नगर विधायक प्रदीप बत्रा अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं और उनके खिलाफ जबरदस्त एंटी इनकंबेंसी है इसलिए कांग्रेस टिकट के बाहरी या भीतरी दावेदार हर चेहरे को लगता है कि उसका जीत जाना आसान होगा, बस यशपाल राणा निर्दलीय चुनाव न लड़ें।
